शीतला माता के भजन | बसोड़ा भजन और आरती
शीतला माता के भजन उत्तर भारत के पुराने लोकगीत हैं। बसोड़ा के दिन औरतें माता की पूजा करते हुए ये भजन गाती हैं। ये गीत माता शीतला की महिम...
पढ़ें →सोमवार प्रदोष व्रत की यह पवित्र कथा कर्ज से छुटकारा और ग्रहों की शांति के लिए बेहद कारगर है। जब त्रयोदशी के दिन सोमवार पड़ता है, तब भगवान शिव और माता पार्वती की एक साथ पूजा करने से विशेष फल मिलता है। इस कथा में एक विधवा ब्राह्मणी और विदर्भ के राजकुमार की जीवन यात्रा का वर्णन है। ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के असर से राजकुमार की शादी गंधर्व कन्या से हुई और उसने अपना खोया राज्य वापस पा लिया। जो भी सोमप्रदोष व्रत करता है, उसके कर्ज, ग्रह बाधा और सभी परेशानियां खत्म हो जाती हैं।
🙏 सोमवार प्रदोष व्रत कथा 🙏
सूत जी बोले - "हे ऋषिवरों! अब मैं सोम त्रयोदशी व्रत का महात्म्य वर्णन करता हूं। इस व्रत के करने से शिव-पार्वती प्रसन्न होते हैं।"
**व्रत विधि:**
"प्रातः स्नान कर शुद्ध-पवित्र हो शिव-पार्वती का ध्यान करके पूजन करें और अर्घ्य दें। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का १०८ बार जाप करें। फिर स्तुति करें - 'हे प्रभो! मैं इस दुःख सागर में गोते खाता हुआ ऋण भार से दबा, ग्रह दशा से ग्रसित हूं। हे दयालु! मेरी रक्षा कीजिए।'"
**कथा:**
शौनकादि ऋषि बोले - "हे महामते! यह व्रत किसने किया और क्या फल पाया?"
सूत जी बोले - "एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी। उसके पति का स्वर्गवास हो गया था। कोई भी उसका सहारा नहीं था। इसलिए वह सुबह होते ही अपने पुत्र के साथ भीख मांगने निकल जाती। जो भिक्षा मिलती उसी से अपना और पुत्र का पेट भरती थी।"
"एक दिन ब्राह्मणी भीख मांगकर लौट रही थी तो उसे एक लड़का मिला। उसकी दशा बहुत खराब थी। ब्राह्मणी को दया आई। वह उसे अपने साथ घर ले आई।"
"वह लड़का विदर्भ का राजकुमार था। पड़ोसी राजा ने उसके पिता पर आक्रमण करके राज्य पर कब्जा कर लिया था। इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था। ब्राह्मणी के घर पर वह ब्राह्मण कुमार के साथ रहकर पलने लगा।"
"एक दिन ब्राह्मण कुमार और राजकुमार खेल रहे थे। उन्हें वहां गंधर्व कन्याओं ने देख लिया। वे राजकुमार पर मोहित हो गईं। ब्राह्मण कुमार तो घर लौट आया लेकिन राजकुमार अंशुमति नामक गंधर्व कन्या से बात करता रह गया।"
"दूसरे दिन अंशुमति अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाने ले आई। उन्हें भी राजकुमार पसंद आया। कुछ दिनों बाद भगवान शंकर ने स्वप्न में आदेश दिया कि वे अपनी कन्या का विवाह राजकुमार से कर दें। उन्होंने अंशुमति का विवाह राजकुमार से कर दिया।"
"ब्राह्मणी को ऋषियों ने आज्ञा दी थी कि वह सदा प्रदोष व्रत करे। उसके व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज की सेनाओं की सहायता से राजकुमार ने विदर्भ से शत्रुओं को मार भगाया। उसने अपने पिता के राज्य को पुनः प्राप्त कर वहां आनंदपूर्वक रहने लगा। राजकुमार ने ब्राह्मण कुमार को अपना प्रधानमंत्री बनाया।"
**निष्कर्ष:**
"राजकुमार और ब्राह्मण कुमार के दिन जिस प्रकार ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत की कृपा से फिरे, उसी प्रकार भगवान शंकर अपने दूसरे भक्तों के दिन भी फेरते हैं। तभी से प्रदोष व्रत का संसार में बड़ा महत्व है।"
🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏
📌 PUJA VIDHI:
- सुबह स्नान जरूरी
- शिव-पार्वती ध्यान करें
- ॐ नमः शिवाय १०८ बार बोलें
- अर्घ्य चढ़ाएं
- दिन में एक बार खाना
📌 व्रत के लाभ
- कर्ज से छुटकारा
- ग्रह दशा में सुधार
- मुसीबतों से निजात
- राज्य की प्राप्ति
📌 प्रदोष व्रत का परिचय
**प्रदोष क्या है:**
प्रदोष का तात्पर्य उस समय से है जब सूर्य अस्त हो जाता है और रात्रि का आगमन होने वाला होता है। यह संध्या और रात्रि के मध्य का काल होता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार यह समय भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस काल में महादेव की आराधना करने से असाधारण फल प्राप्त होता है।
**व्रत कैसे करें:**
त्रयोदशी की तिथि पर व्रत रखने वाले को पूरे दिन कुछ भी नहीं खाना चाहिए। शाम के समय जब सूरज डूबने में तीन घड़ी बची हो, तब स्नान करके साफ सफेद कपड़े पहन लें। इसके बाद संध्या वंदन करके भगवान शिव की पूजा शुरू करें।
पूजा करने की जगह को पानी से साफ करके वहां मंडप बना लें। पांच रंगों के फूलों से कमल का आकार बनाएं और कुश का आसन बिछा दें। आसन पर पूर्व दिशा में मुंह करके बैठें। फिर भगवान महादेव का ध्यान करें।
**भगवान शिव का ध्यान:**
करोड़ों चांदों जैसी चमक वाले, तीन आंखों वाले, सिर पर चांद धारण करने वाले, भूरे रंग की जटाएं रखने वाले, नीले गले वाले, अनेक रुद्राक्ष की मालाओं से सजे हुए, आशीर्वाद देने वाले हाथ वाले, त्रिशूल धारण करने वाले, नागों के कुंडल पहने हुए, बाघ की खाल ओढ़े हुए, रत्नों से जड़े सिंहासन पर बैठे भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।
**व्रत का समापन कैसे करें:**
सुबह नहा-धोकर रंग-बिरंगे कपड़ों से मंडप सजाएं। उस मंडप में शिव-पार्वती की मूर्ति रखकर विधि से पूजा करें। फिर शिव-पार्वती के लिए खीर से हवन करना चाहिए।
हवन करते समय 'ॐ उमा सहित शिवाय नमः' मंत्र बोलकर १०८ बार आहुति डालें। इसी तरह 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र से भगवान शंकर के लिए आहुति दें। हवन पूरा होने पर किसी धार्मिक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दान दें।
इसके बाद ब्राह्मणों को खाना खिलाएं और दक्षिणा दें। ब्राह्मणों से कहलवाएं कि व्रत पूरा हुआ। ब्राह्मणों की आज्ञा लेकर अपने परिवार वालों के साथ भगवान शंकर को याद करते हुए भोजन करें।
इस तरह व्रत का समापन करने से व्रत रखने वाले को पुत्र-पौत्र की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। साथ ही दुश्मनों पर जीत मिलती है और सभी पापों से छुटकारा मिलता है। यह स्कंद पुराण में लिखा गया है।
**त्रयोदशी व्रत क्यों महत्वपूर्ण है:**
त्रयोदशी यानी प्रदोष व्रत करने वाला व्यक्ति हमेशा खुश रहता है। इस व्रत के प्रभाव से सभी पापों का नाश हो जाता है। यह व्रत करने से विधवा स्त्रियों को अधर्म से घृणा होती है और सुहागन स्त्रियों का सुहाग स्थिर रहता है। कैदी को जेल से मुक्ति मिलती है।
जो स्त्री-पुरुष जिस इच्छा से यह व्रत रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं कैलाश के स्वामी भगवान शंकर पूरी करते हैं। सूत जी बताते हैं कि त्रयोदशी व्रत करने वाले को सौ गायों के दान जितना पुण्य मिलता है।
इस व्रत को जो सही तरीके से और पूरे मन से करता है, उसके सभी दुख दूर हो जाते हैं। सभी महिलाओं को ग्यारह त्रयोदशी या पूरे साल की २६ त्रयोदशी पूरी करने के बाद उद्यापन करना चाहिए।
**प्रदोष व्रत में दिनों का महत्व:**
त्रयोदशी तिथि पर जो भी दिन पड़ता है, उसी दिन के हिसाब से व्रत करना चाहिए और उसी दिन की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। खासतौर पर रविवार, सोमवार और शनिवार के प्रदोष व्रत जरूर करने चाहिए। इन सभी से मनचाहा फल मिलता है।
**अलग-अलग दिनों के प्रदोष व्रत:**
१. **रविवार का प्रदोष व्रत** - लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रविवार प्रदोष व्रत रखें।
२. **सोमवार का प्रदोष व्रत** - ग्रहों की खराब दशा दूर करने के लिए सोमवार प्रदोष व्रत करें।
३. **मंगलवार का प्रदोष व्रत** - बीमारियों से छुटकारा और स्वास्थ्य के लिए मंगलवार प्रदोष व्रत रखें।
४. **बुधवार का प्रदोष व्रत** - सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए बुधवार प्रदोष व्रत करें।
५. **गुरुवार का प्रदोष व्रत** - दुश्मनों के नाश के लिए गुरुवार प्रदोष व्रत रखें।
६. **शुक्रवार का प्रदोष व्रत** - सौभाग्य और स्त्री की समृद्धि के लिए शुक्रवार प्रदोष व्रत करें।
७. **शनिवार का प्रदोष व्रत** - खोया राज्य और पद पाने के लिए शनिवार प्रदोष व्रत रखें।
**व्रत से क्या लाभ होता है:**
प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को ये लाभ मिलते हैं:
• सभी पापों से मुक्ति मिलती है
• धन-दौलत की प्राप्ति होती है
• संतान का सुख मिलता है
• अच्छा स्वास्थ्य मिलता है
• दुश्मनों पर विजय मिलती है
• मनोकामनाएं पूरी होती हैं
• जेल से छुटकारा मिलता है
• सुहाग स्थिर रहता है
• राज्य और पद की प्राप्ति होती है
**जरूरी बातें:**
- व्रत के दिन कुछ नहीं खाएं
- प्रदोष काल में पूजा जरूर करें
- सफेद कपड़े पहनें
- बेल पत्र जरूर चढ़ाएं
- ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें
- ब्राह्मणों को खाना और दक्षिणा दें
- कथा जरूर सुनें
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