श्री लक्ष्मीनारायण स्तोत्र / नमो नारायण (short stotras) | Lakshmi‑Narayana — मंत्र व पाठ
श्री लक्ष्मीनारायण का संक्षिप्त जप श्री विष्णु‑नारायण और लक्ष्मी‑देवी के सम्मिलित आशीर्वाद के लिये किया जाता है। छोटे‑स्तोत्र और ...
पढ़ें →महालक्ष्मी अष्टक इंद्र देव द्वारा रचित माता लक्ष्मी की अत्यंत शक्तिशाली स्तुति है। इसके नियमित पाठ से दरिद्रता का नाश होता है और अष्टलक्ष्मी की प्राप्ति होती है। जो भक्त प्रतिदिन पूर्ण श्रद्धा के साथ इस अष्टक का गान करते हैं, उन पर माता महालक्ष्मी की अटूट कृपा बनी रहती है। यह स्तोत्र जीवन में सौभाग्य, यश और आर्थिक स्थिरता लाने के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।। 1 ।।
नमस्ते गरुडध्वजायै सुरासुरप्रियाय च ।
नमस्ते स्तम्भनभूते देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।। 2 ।।
नमस्ते करकालिकायै सकलज्ञानप्रदेयी ।
नमस्ते सिंहवाहिन्यै च त्रिपुरसुन्दरी नमोऽस्तु ते ।। 3 ।।
नमस्ते योगक्षेमप्रियाय लक्ष्मी भवानी नमोऽस्तु ते ।
नमस्ते सर्वपापहरे देवी महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।। 4 ।।
नमस्ते रूपवर्णदेवाय श्रद्धाविश्वासप्रदायिनि ।
नमस्ते कामप्रदायिनि च परमं तं नमाम्यहम् ।। 5 ।।
नमस्ते स्वभक्तानां कामाय सिद्धिकारिणे ।
नमस्ते खलदृश्चक्षुभ्यां नमोऽस्तु भुवनेश्वरि ।। 6 ।।
नमस्ते तेजस्विन्यै महाशक्त्यै शर्वाण्यै नमोऽस्तु ते ।
नमस्ते परित्राणरूपाय त्रिपुरा पलायने ।। 7 ।।
नमस्ते चित्तविनोदयै स्मितोपम्यविभूषिते ।
नमस्ते परमं गौर्यै सर्वमङ्गलमङ्गलाये ।। 8 ।।
Namastestu Mahāmāye Śrī‑pīṭhe Sura‑pūjite |
Śaṅkha‑cakra‑gadā‑haste Mahālakshmi Namo'stu Te || 1 ||
Namaste Garuḍadhvajāyai Surā‑asura‑priyāya Cha |
Namaste Stambhana‑bhūte Devi Mahālakshmi Namo'stu Te || 2 ||
Namaste Karakālikāyai Sakala‑jñāna‑pradeyī |
Namaste Siṃha‑vāhinyai Cha Tripura‑Sundarī Namo'stu Te || 3 ||
Namaste Yogakṣema‑priyāya Lakṣmī Bhavānī Namo'stu Te |
Namaste Sarva‑pāpa‑hare Devi Mahālakshmi Namo'stu Te || 4 ||
Namaste Rūpa‑varṇa‑devāya Śraddhā‑viśvāsa‑pradāyinī |
Namaste Kāma‑pradāyinī Cha Paramaṃ Tam Namāmyaham || 5 ||
Namaste Sva‑bhaktānāṃ Kāmāya Siddhi‑kāriṇe |
Namaste Khaladṛś‑cakṣubhyāṃ Namo'stu Bhuvaneśvari || 6 ||
Namaste Tejasvinyai Mahā‑śaktyai Śarvāṇyai Namo'stu Te |
Namaste Paritrāṇa‑rūpāya Tripurā Palāyane || 7 ||
Namaste Citta‑vinodayai Smito‑pamya‑vibhūṣite |
Namaste Paramaṃ Gauryai Sarva‑maṅgala‑maṅgalāye || 8 ||
Meaning — शब्द‑वार / भावार्थ (पङ्क्ति‑वार संक्षेप)
भावार्थ (पंक्ति‑१): मैं उस महालक्ष्मी को नमन करता/करती हूँ, जो श्री‑पीठ पर विराजमान होकर देवों द्वारा पूजित है और शङ्कु‑चक्र‑गदा धारण करती हैं।
भावार्थ (पंक्ति‑२): तुम गरुड़ध्वजिनी और सभी के प्रिय हो; तुम विघ्ननाशिन्या हो — तुझे नमन।
भावार्थ (पंक्ति‑३): हे वो देवी जिनकी करों में समय/शक्ति है और जो समस्त ज्ञानप्रद हैं, सिंहवाहिनी और त्रिपुरा‑सुन्दरी—तुम्हें प्रणाम।
भावार्थ (पंक्ति‑४): जो योग‑क्षेम का ध्यान करती हैं और सर्वपाप हरती हैं—महालक्ष्मी तुझे नमन।
भावार्थ (पंक्ति‑५): तुम रूप‑वंशी, श्रद्धा और विश्वास देने वाली तथा इच्छापूर्ति करने वाली हो—तुम्हें परम नमन।
भावार्थ (पंक्ति‑६): जो अपने भक्तों की कामना पूरी करतीं और दुष्टों की दुर्भावनाओं को विफल कर देतीं—तुम्हें नमन।
भावार्थ (पंक्ति‑७): तुम तेजस्विनी महाशक्ति हो, सबका रक्षक और उद्धारकर्ता—तुम्हें नमन।
भावार्थ (पंक्ति‑८): जो हृदय को आनन्दित करतीं, स्मित जैसी शोभा देतीं और सर्व‑मंगल की जननी हैं—तुम्हें परम नमन।
उपयोग (जप‑विधि, लाभ और प्रैक्टिकल सुझाव)
कब और कैसे पाठ करें:
जप‑गणना व प्रस्तावित योजना:
लाभ (परंपरागत एवं व्यावहारिक):
पाठ के साथ सुझाव:
सावधानियाँ:
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