शीतला माता के भजन – बसोड़ा के पारंपरिक गीत

शीतला माता के भजन और गीत उत्तर भारत की पुरानी लोक परंपरा का अनमोल हिस्सा हैं। बसोड़ा या शीतला अष्टमी के दिन औरतें माता शीतला की पूजा करते समय ये पुराने लोकगीत गाती हैं। ये गीत माता शीतला की महिमा, उनकी दयालुता और बीमारियों से बचाव की प्रार्थना से भरे हुए हैं। शीतला माता को ठंडक देने वाली, रोग दूर करने वाली और सेहत की देवी माना जाता है। इन गीतों में माता की सवारी, उनका कलश, गधे पर बैठी स्वरूप और उनकी कृपालुता का प्यारा वर्णन मिलता है। राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में ये लोकगीत कई पीढ़ियों से गाए जा रहे हैं। बसोड़ा के दिन जब घर में बासी खाने का भोग लगाया जाता है, तब ये गीत गाकर माता शीतला को बुलाया जाता है। यहां आपको शीतला माता के सभी मुख्य भजन, लोकगीत और आरती मिलेंगे जो आप बसोड़ा के व्रत में गा सकते हैं।

शीतला माता के भजन | बसोड़ा भजन और आरती

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परिचय

शीतला माता के भजन उत्तर भारत की पुरानी लोक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बसोड़ा या शीतला अष्टमी के दिन औरतें माता शीतला की पूजा करते हुए ये मधुर भजन गाती हैं। ये भजन माता शीतला की महिमा, उनकी दयालुता और रोगों से मुक्ति की प्रार्थना से भरे हैं। शीतला माता गधे पर बैठकर आती हैं, हाथ में ठंडे पानी का कलश लेकर आती हैं और सभी रोगों को दूर कर देती हैं। इन लोकगीतों में माता के रूप, उनकी दयालुता और भक्तों पर कृपा का सुंदर वर्णन है। ये गीत पीढ़ियों से माताओं द्वारा बेटियों को सिखाए जाते हैं।

Sheetala Mata's bhajans are an important part of North India's old folk tradition. On Basoda or Sheetala Ashtami, women sing these melodious bhajans while worshipping Mata Sheetala. These bhajans are filled with Mata Sheetala's glory, her kindness and prayers for freedom from diseases. Mata Sheetala comes riding on a donkey, carrying a pot of cool water in her hand and removes all diseases. These folk songs beautifully describe Mata's form, her kindness and grace on devotees. These songs have been taught by mothers to daughters for generations.

शीतला माता के भजन | बसोड़ा भजन और आरती

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🙏 शीतला माता के भजन 🙏

**शीतला माता भजनों का महत्व:**

शीतला माता के भजन सिर्फ गीत नहीं हैं, बल्कि उत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत हैं। ये भजन बसोड़ा के पर्व पर गाए जाते हैं और माता शीतला की कृपा पाने के लिए भक्ति भाव से गाए जाते हैं।

इन भजनों में माता शीतला की महिमा, उनका रूप, बीमारियों से रक्षा और भक्तों पर उनकी कृपा का वर्णन है।

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**गीत १ - शीतला माई री सवारी**

शीतला माई री सवारी आई
गधे पर बैठी शीतला माई
कलश भरा लाई शीतला माई

ठंडा पानी लाई शीतला माई
रोग सब हराई शीतला माई
भक्तन पर छाई शीतला माई

नीम की डाली लाई शीतला माई
सूप हाथ में लाई शीतला माई
शीतल हवा चलाई शीतला माई

बासी खाना भाई शीतला माई
चूल्हा ना जलाई शीतला माई
शीतलता फैलाई शीतला माई

जय-जय शीतला माई
कृपा करो शीतला माई
सुख दो शीतला माई

**अर्थ:** शीतला माता की सवारी आई है। वे गधे पर बैठी हैं। हाथ में ठंडे पानी का कलश लाई हैं। सभी रोग हर लेती हैं। नीम की डाल और सूप हाथ में है। ठंडी हवा चलाती हैं। बासी खाना खाती हैं, चूल्हा नहीं जलाती। शीतलता फैलाती हैं।

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**गीत २ - बसोड़े री माई**

बसोड़े री माई आई
शीतल जल की धार लाई
बीमारी सब भगाई
शीतला माई आई

होली के बाद आई
चैत की अष्टमी आई
बासी भोजन खाई
शीतला माई आई

गधे पर सवार होई
कलश सर पर धार होई
नीम की डाल संग होई
शीतला माई आई

घर-घर में पूजा होई
भक्तन की सेवा होई
रोग-शोक सब खोई
शीतला माई आई

माता तुम दयालु
माता तुम कृपालु
सबकी रखवालु
शीतला माई हो

**अर्थ:** बसोड़ा की माता आई हैं। ठंडे पानी की धार लाई हैं। सभी बीमारियां भगाई हैं। होली के बाद चैत की अष्टमी को आती हैं। बासी भोजन खाती हैं। गधे पर सवार हैं। हर घर में पूजा होती है। सभी की रक्षा करती हैं।

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**गीत ३ - शीतला माता भजन**

शीतला तेरी जय हो माई
रोग हरे तू सबकी माई
गधे पे सवार होके आई
कलश भरा लाई माई

चेचक माता तू ही है
खसरा दूर करे तू ही है
बुखार हराए तू ही है
शीतला माई जय हो

ठंडा पानी तुझे प्रिय है
बासी भोजन तुझे प्रिय है
शीतल हवा तुझे प्रिय है
शीतला माई जय हो

नीम की पत्ती चढ़ाऊं
फूल प्रेम से चढ़ाऊं
भोग लगा के मनाऊं
शीतला माई जय हो

सबके रोग मिटाओ माई
घर-घर सुख पहुंचाओ माई
भक्तन को तारो माई
शीतला माई जय हो

**अर्थ:** हे शीतला माई, आपकी जय हो। आप सबके रोग हरती हैं। गधे पर सवार होकर आती हैं। आप चेचक, खसरा, बुखार दूर करती हैं। आपको ठंडा पानी, बासी भोजन और ठंडी हवा प्रिय है। आप सबके रोग मिटाओ।

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**गीत ४ - शीतला माता आरती**

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता
तुम को निस दिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा सुरी गणा
जय शीतला माता...

गर्दभ पर तुम सवार, कलश सिर धार
नीम पत्र तुझे भावे, सूप हाथ में मैया
जय शीतला माता...

ठंडा जल तुझे भावे, बासी खीर चढ़ावे
शीतल हवा चलावे, कृपा करो मैया
जय शीतला माता...

चेचक की माता कहावे, रोगन को दूर भगावे
भक्तन को सुख पावे, दर्शन दो मैया
जय शीतला माता...

जो कोई तुझे ध्यावे, फल चार पहावे
दुख-दर्द मिट जावे, सुख पावे मैया
जय शीतला माता...

शीतला माई की आरती, जो कोई जन गावे
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे
जय शीतला माता...

**अर्थ:** हे शीतला माता, आपकी जय हो। देवता भी आपका ध्यान करते हैं। आप गधे पर सवार हैं, कलश सिर पर धारण किए हैं। नीम के पत्ते, ठंडा पानी, बासी खीर आपको प्रिय है। आप चेचक की माता कहलाती हैं, रोगों को दूर भगाती हैं।

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**गीत ५ - शीतला माई का गीत**

शीतला माई हमारी माई
रोग दूर करने वाली माई
गधे पर आने वाली माई
कलश लिए आने वाली माई

बसोड़े के दिन आई माई
बासी खाना खाई माई
चूल्हा ना जलाई माई
शीतलता फैलाई माई

सप्तमी को खाना बनाई
अष्टमी को पूजा कराई
ठंडा भोग लगाई
सबको सुख पहुंचाई

नीम पत्र चढ़ावे भगत
फूल माला पहनावे भगत
ठंडा पानी चढ़ावे भगत
भक्ति भाव दिखावे भगत

माई तुम दयावान
माई तुम भगवान
माई तुम महान
शीतला माई जय हो

**अर्थ:** शीतला माई हमारी माई हैं। रोग दूर करती हैं। गधे पर आती हैं। बसोड़ा के दिन आती हैं। सप्तमी को खाना बनाते हैं, अष्टमी को पूजा करते हैं। भक्त नीम पत्र, फूल, ठंडा पानी चढ़ाते हैं।

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**गीत ६ - शीतला माता स्तुति**

शीतले त्वं जगद्धात्री
शीतला त्वं जगत्प्रिया
शीतलेन स्वरूपेण
सर्वदा पालय प्रभो

ठंडक देने वाली माई
रोग हरने वाली माई
सुख देने वाली माई
शीतला तुम महान हो

गर्दभारूढे देवी
कलशहस्ते शुभप्रदे
नीमपत्रप्रिये देवी
शीतले त्वां नमामि अहम्

माता तुम सबकी रक्षक
माता तुम सबकी पालक
माता तुम सबकी त्राणक
शीतला माई जय हो

**अर्थ:** हे शीतला माता, आप जगत की धारण करने वाली हैं, सबको प्रिय हैं। शीतल स्वरूप से सबका पालन करती हैं। ठंडक देती हैं, रोग हरती हैं। गधे पर सवार, हाथ में कलश, नीम पत्र को प्रिय मानने वाली देवी को नमस्कार।

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**गीत ७ - बसोड़ा का लोकगीत**

आज बसोड़े का दिन आया
शीतला माई घर में आया
ठंडा भोजन हम ने खाया
शीतला माई को मनाया

कल खाना बनाया घर में
आज ना चूल्हा जलाया घर में
बासी प्रसाद चढ़ाया घर में
शीतला माई बुलाया घर में

गधे की सवारी निकली गली में
कलश का पानी छलका गली में
भक्तन की भीड़ लगी गली में
शीतला माई आई गली में

नीम पत्र की माला लाए
फूल सफेद चढ़ाए
ठंडा जल अर्पित कराए
शीतला माई मनाए

रोग सभी दूर हो जाए
घर में सुख आ जाए
परिवार स्वस्थ रह जाए
शीतला माई की कृपा हो जाए

**अर्थ:** आज बसोड़ा का दिन है। शीतला माई घर आई हैं। हमने ठंडा भोजन खाया। कल खाना बनाया, आज चूल्हा नहीं जलाया। बासी प्रसाद चढ़ाया। नीम पत्र, सफेद फूल, ठंडा पानी चढ़ाया। सभी रोग दूर हों।

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**गीत ८ - शीतला माई की महिमा**

शीतला माई महान है
शीतला माई दयावान है
शीतला माई भगवान है
शीतला माई की जय हो

चेचक खसरा भगाती
बुखार ताप मिटाती
त्वचा रोग हराती
शीतला माई की जय हो

होली के बाद आती
चैत महीने में आती
अष्टमी को मनाती
शीतला माई की जय हो

बासी भात चढ़ावे भगत
ठंडा पानी लावे भगत
नीम पत्र चढ़ावे भगत
शीतला माई की जय हो

घर-घर में पूजन होवे
रोग-शोक सब खोवे
सुख-शांति सब पावे
शीतला माई की जय हो

**अर्थ:** शीतला माई महान और दयावान हैं। चेचक, खसरा, बुखार, त्वचा रोग मिटाती हैं। होली के बाद चैत की अष्टमी को आती हैं। भक्त बासी भात, ठंडा पानी, नीम पत्र चढ़ाते हैं। सभी के घर में सुख-शांति आती है।

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**गीत ९ - शीतला माता प्रार्थना**

माता शीतला तुम्हें प्रणाम
करूं तुम्हारा गुणगान
दो मुझको वरदान
शीतला माई जय हो

मेरे घर में आओ माई
सुख-समृद्धि लाओ माई
रोग-शोक भगाओ माई
शीतला माई जय हो

ठंडा जल अर्पित करूं
बासी भोग लगा करूं
नीम पत्र चढ़ा करूं
शीतला माई जय हो

परिवार को स्वस्थ रखो
बच्चों को सुरक्षित रखो
घर में शांति रखो
शीतला माई जय हो

तुम्हारी शरण में आया
तुम्हारा भजन गाया
तुम्हें मन से पाया
शीतला माई जय हो

**अर्थ:** हे शीतला माता, मैं आपको प्रणाम करता हूं। मेरे घर आओ, सुख-समृद्धि लाओ। मैं ठंडा जल, बासी भोग, नीम पत्र अर्पित करता हूं। परिवार को स्वस्थ रखो, बच्चों को सुरक्षित रखो। मैं आपकी शरण में आया हूं।

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**गीत १० - शीतला माई का चालीसा (संक्षिप्त)**

जय शीतला माई करुणामयी
रोगहर्ता जगतपालिनी सबकी प्यारी माई

गर्दभारूढ़ा कलशधारिणी
नीमपत्रप्रिया शुभकारिणी

चैत्र मासे अष्टमी तिथि पर
भक्तजन करें पूजा सत्वर

बासी भोजन तुझे भावे
शीतल जल प्रिय तुम्हें आवे

चेचक माता तुम ही हो
खसरा हर्ता तुम ही हो

ज्वर दूर करने वाली
त्वचा रोग हराने वाली

भक्तन के दुख हारो माई
सुख-समृद्धि विस्तारो माई

जो तुम्हें ध्यावे शीश नवावे
सुख-शांति घर में पावे

शीतला माई की जय बोलो
सबके रोग हरो माई

**अर्थ:** हे शीतला माई, आप करुणामयी हैं, रोग हरने वाली हैं। गधे पर सवार, कलश धारण करने वाली, नीम पत्र को प्रिय मानने वाली। चैत्र की अष्टमी को भक्त पूजा करते हैं। आपको बासी भोजन और ठंडा पानी प्रिय है। आप चेचक, खसरा, बुखार, त्वचा रोग दूर करती हैं।


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**शीतला माता भजन गाने के तरीके:**

१. भजन साफ उच्चारण से गाएं
२. भक्ति के भाव से गाएं
३. बसोड़ा के दिन जरूर गाएं
४. पूजा के समय गाएं
५. सब मिलकर गाकर आनंद लें
६. बड़ी-बुजुर्ग औरतों से सीखें

**खास बातें:**

- ये भजन उत्तर भारत की लोक संस्कृति की धरोहर हैं
- माताओं से बेटियों को सिखाए जाते हैं
- बसोड़ा के समय पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है
- ये भजन सेहत, सुरक्षा और माता की कृपा के प्रतीक हैं
- शीतला माता की महिमा का गान करते हैं
- बसोड़ा के दिन हर घर में ये भजन गूंजते हैं
- लड़कियां इन भजनों को बड़े उत्साह से गाती हैं

**शीतला माता के भजन कब गाएं:**

- बसोड़ा की सप्तमी को खाना बनाते समय
- अष्टमी की सुबह पूजा करते समय
- माता को भोग लगाते समय
- आरती के समय
- मंदिर जाते समय
- प्रसाद बांटते समय

**भजन गाने के फायदे:**

- माता शीतला प्रसन्न होती हैं
- घर में शांति आती है
- बीमारियां दूर रहती हैं
- मन को सुकून मिलता है
- भक्ति भाव बढ़ता है
- परिवार में एकता आती है

🙏 जय माता शीतला 🙏
🙏 शीतलायै नमः 🙏
🙏 रोग हरो माई 🙏