शीतला माता बसोड़ा | शीतला अष्टमी पूजा और कथा
शीतला माता बसोड़ा चैत्र कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है। यह माता शीतला का पर्व है। एक दिन पहले खाना बना लेते हैं और अष्टमी के दिन चूल्हा ...
पढ़ें →पूजा हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण अंग है जो हमें परमात्मा से जोड़ती है। सही पूजा विधि जानना उतना ही आवश्यक है जितना पूजा करना। प्रत्येक देवी-देवता की पूजा की अपनी विशेष विधि होती है। पूजा में मंत्रोच्चारण, आसन, मुद्रा, पूजा सामग्री और समय का विशेष महत्व है। पूजा करने से पहले स्वयं को शुद्ध करना, पूजा स्थल को साफ करना और मन को एकाग्र करना आवश्यक है। पूजा में पंचोपचार (गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य) या षोडशोपचार (सोलह प्रकार की सेवाएं) की जाती हैं। प्रत्येक उपचार का अपना महत्व और मंत्र होता है। घर में नित्य पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वास्तु दोष दूर होते हैं। विशेष अवसरों पर विशेष पूजा जैसे सत्यनारायण पूजा, लक्ष्मी पूजा, गणेश पूजा आदि की जाती है। यहां आपको विभिन्न प्रकार की पूजा की संपूर्ण विधि मिलेगी - दैनिक पूजा से लेकर विशेष पूजाओं तक। प्रत्येक पूजा के लिए आवश्यक सामग्री की सूची, मंत्र, आरती और पूजा का सही समय भी बताया गया है। सरल भाषा में लिखी गई यह विधियां घर पर आसानी से अपनाई जा सकती हैं।
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पढ़ें →गणगौर राजस्थान का प्रसिद्ध त्योहार है जो माता गौरी को समर्पित है। यह चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। होली के बाद 18 दिन का यह व्रत ...
पढ़ें →महाशिवरात्रि का व्रत फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को किया जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था। शिवरात्र...
पढ़ें →प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि पर किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है। प्रदोष का अर्थ है सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पूर्व का समय। इस का...
पढ़ें →शनिवार प्रदोष व्रत की कथा एक गरीब ब्राह्मणी से जुड़ी है। उसके दो बेटे थे - धर्म और शुचिव्रत। शांडिल्य ऋषि की सलाह पर उन्होंने प्रदोष व...
पढ़ें →शुक्रवार प्रदोष व्रत की कथा तीन दोस्तों से जुड़ी है। एक सेठ के बेटे ने शुक्रास्त में अपनी बीवी को ले आया। रास्ते में गाड़ी टूटी, डाकुओ...
पढ़ें →बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत की कथा देवताओं और वृत्रासुर की लड़ाई से जुड़ी है। वृत्रासुर पहले चित्ररथ नाम का राजा था जिसे माता पार्वती ने...
पढ़ें →बुधवार प्रदोष व्रत की कथा एक व्यक्ति से जुड़ी है जिसकी नई शादी हुई थी। उसने बुधवार को अपनी बीवी को ले आया। घरवालों ने मना किया पर वह नही...
पढ़ें →मंगलवार प्रदोष व्रत की कथा एक बुढ़िया से जुड़ी है जो मंगलवार को हनुमान जी का व्रत रखती थी। उसका बेटा मंगलिया था। साधु बने हनुमान जी ने ...
पढ़ें →रविवार प्रदोष व्रत की कथा एक निर्धन ब्राह्मण परिवार से जुड़ी है। ब्राह्मणी नियमपूर्वक प्रदोष व्रत रखती थी। उनका बेटा गंगा नहाने गया ...
पढ़ें →सत्यनारायण व्रत कथा पांच अध्यायों में विभाजित एक पवित्र कथा है। देवर्षि नारद ने मानव कल्याण के लिए भगवान विष्णु से इस व्रत का ज्ञान प...
पढ़ें →शुक्रवार संतोषी माता व्रत की यह कथा एक महिला के बारे में है जो अपने परिवार में उपेक्षित जीवन जी रही थी। उसका पति बारह वर्ष पहले परदेश च...
पढ़ें →गुरुवार व्रत की यह पावन कथा एक निर्धन ब्राह्मण और उनकी कन्या के विषय में है। ब्राह्मण अत्यंत गरीब थे और उनकी पत्नी अस्वच्छता में रहती ...
पढ़ें →गुरुवार व्रत की यह पावन कथा एक उदार राजा और उनकी पत्नी के बारे में है। राजा प्रतिदिन दान-धर्म करते थे और गुरुवार का व्रत रखते थे, लेकिन ...
पढ़ें →सावित्री सत्यवान व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को विवाहित महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु हेतु रखा जाता है। इस व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा ...
पढ़ें →होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। भक्त प्रह्लाद की भक्ति से होलिका भस्म हुई। जानें इसका महत्व, पूजा विधि और व्रत की परं...
पढ़ें →गणगोर बिंदायक जी की कहानी, Gangaur Bindayak Ki Kahani, चैत्र महीना का महत्व, Significance of Chaitra Mahina, गणगोर बिंदायक जी का इतिहास, History of Gangaur Bindayak Ji, बिंदायक जी के चमत्कार, Mi...
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