शीतला माता के भजन | बसोड़ा भजन और आरती
शीतला माता के भजन उत्तर भारत के पुराने लोकगीत हैं। बसोड़ा के दिन औरतें माता की पूजा करते हुए ये भजन गाती हैं। ये गीत माता शीतला की महिम...
पढ़ें →मंगलवार प्रदोष व्रत की यह पवित्र कथा बीमारियों से छुटकारा और स्वस्थ जीवन पाने के लिए बहुत असरदार है। जब त्रयोदशी के दिन मंगलवार पड़ता है, तब भगवान शिव की पूजा करने से सभी बीमारियां खत्म हो जाती हैं। इस कथा में एक बुढ़िया और उसके बेटे मंगलिया की कहानी है जिन्होंने हनुमान जी का व्रत किया। साधु के भेष में हनुमान जी ने बुढ़िया की परीक्षा ली और उसकी पक्की श्रद्धा देखकर मंगलिया को फिर से जिंदा कर दिया। जो भी मंगल प्रदोष व्रत करता है, वह सभी बीमारियों और पापों से मुक्त हो जाता है।
🙏 मंगलवार प्रदोष व्रत कथा 🙏
सूत जी बोले - "अब मैं मंगल त्रयोदशी प्रदोष व्रत का विधि-विधान कहता हूं। मंगलवार का दिन व्याधियों का नाशक है।"
**व्रत विधि:**
"इस व्रत में एक समय व्रती को गेहूं और गुड़ का भोजन करना चाहिए। देव प्रतिमा पर लाल रंग का फूल चढ़ाना और स्वयं लाल वस्त्र धारण करना चाहिए। इस व्रत के करने से मनुष्य सभी पापों और रोगों से मुक्त हो जाता है।"
**कथा:**
"अब मैं आपको उस वृद्धा की कथा सुनाता हूं जिसने यह व्रत किया और मोक्ष प्राप्त हुआ।"
"अत्यंत प्राचीन काल की घटना है। एक नगर में एक वृद्धा रहती थी। उसके मंगलिया नाम का एक पुत्र था। वृद्धा को हनुमान जी पर बड़ी श्रद्धा थी। वह प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी का व्रत रखकर यथाविधि उनका भोग लगाती थी। इसके अलावा मंगलवार को न तो घर लीपती थी और न ही मिट्टी खोदती थी।"
"इसी प्रकार व्रत रखते हुए जब काफी दिन बीत गए तो हनुमान जी ने सोचा कि चलो आज इस वृद्धा की श्रद्धा की परीक्षा करें। वे साधु का वेश बनाकर उसके द्वार पर पहुंचे और पुकारा - 'है कोई हनुमान का भक्त जो हमारी इच्छा पूरी करे।'"
"वृद्धा ने पुकार सुनी तो बाहर आई और पूछा - 'महाराज, क्या आज्ञा है?' साधु वेशधारी हनुमान जी बोले - 'मैं बहुत भूखा हूं, भोजन करूंगा। तू थोड़ी सी जमीन लीप दे।'"
"वृद्धा बड़ी दुविधा में पड़ गई। अंत में हाथ जोड़कर प्रार्थना की - 'हे महाराज! लीपने और मिट्टी खोदने के अतिरिक्त जो काम आप कहें वह मैं करने को तैयार हूं।'"
"साधु ने तीन बार परीक्षा के बाद कहा - 'तू अपने बेटे को बुला, मैं उसे औंधा लिटाकर उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा।'"
"वृद्धा ने सुना तो स्तब्ध रह गई, मगर वह वचन हार चुकी थी। उसने मंगलिया को पुकारकर साधु महाराज के हवाले कर दिया। साधु ने वृद्धा के हाथों से ही मंगलिया को औंधा लिटाकर उसकी पीठ पर आग जलवाई।"
"आग जलाकर दुखी मन से वृद्धा अपने घर अंदर चली गई। साधु जब भोजन बना चुका तो उसने वृद्धा को बुलाकर कहा कि वह मंगलिया को पुकारे ताकि वह भी आकर भोग लगा ले।"
"वृद्धा आंखों में आंसू भरकर बोली - 'अब उसका नाम लेकर मेरे हृदय को और न दुखाओ।' लेकिन साधु महाराज न माने तो वृद्धा को मंगलिया को पुकारना पड़ा।"
"पुकारने की देर थी कि मंगलिया बाहर से हंसता हुआ घर में दौड़ा आया। मंगलिया को जीवित देखकर वृद्धा को सुखद आश्चर्य हुआ। वह साधु महाराज के चरणों में गिर पड़ी।"
"साधु महाराज ने उसे अपने असली रूप के दर्शन दिए। हनुमान जी को अपने आंगन में देखकर वृद्धा को लगा कि जीवन सफल हो गया।"
🙏 जय हनुमान 🙏
🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏
📌 PUJA VIDHI:
- सुबह नहाना जरूरी
- लाल कपड़े पहनें
- लाल फूल चढ़ाएं
- गेहूं-गुड़ का खाना खाएं
- एक बार ही भोजन करें
📌 व्रत के लाभ :
- बीमारियां दूर होती हैं
- स्वास्थ्य अच्छा रहता है
- पापों से छुटकारा मिलता है
- मोक्ष मिलता है
📌 प्रदोष व्रत का परिचय
**प्रदोष क्या है:**
प्रदोष का तात्पर्य उस समय से है जब सूर्य अस्त हो जाता है और रात्रि का आगमन होने वाला होता है। यह संध्या और रात्रि के मध्य का काल होता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार यह समय भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस काल में महादेव की आराधना करने से असाधारण फल प्राप्त होता है।
**व्रत कैसे करें:**
त्रयोदशी की तिथि पर व्रत रखने वाले को पूरे दिन कुछ भी नहीं खाना चाहिए। शाम के समय जब सूरज डूबने में तीन घड़ी बची हो, तब स्नान करके साफ सफेद कपड़े पहन लें। इसके बाद संध्या वंदन करके भगवान शिव की पूजा शुरू करें।
पूजा करने की जगह को पानी से साफ करके वहां मंडप बना लें। पांच रंगों के फूलों से कमल का आकार बनाएं और कुश का आसन बिछा दें। आसन पर पूर्व दिशा में मुंह करके बैठें। फिर भगवान महादेव का ध्यान करें।
**भगवान शिव का ध्यान:**
करोड़ों चांदों जैसी चमक वाले, तीन आंखों वाले, सिर पर चांद धारण करने वाले, भूरे रंग की जटाएं रखने वाले, नीले गले वाले, अनेक रुद्राक्ष की मालाओं से सजे हुए, आशीर्वाद देने वाले हाथ वाले, त्रिशूल धारण करने वाले, नागों के कुंडल पहने हुए, बाघ की खाल ओढ़े हुए, रत्नों से जड़े सिंहासन पर बैठे भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।
**व्रत का समापन कैसे करें:**
सुबह नहा-धोकर रंग-बिरंगे कपड़ों से मंडप सजाएं। उस मंडप में शिव-पार्वती की मूर्ति रखकर विधि से पूजा करें। फिर शिव-पार्वती के लिए खीर से हवन करना चाहिए।
हवन करते समय 'ॐ उमा सहित शिवाय नमः' मंत्र बोलकर १०८ बार आहुति डालें। इसी तरह 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र से भगवान शंकर के लिए आहुति दें। हवन पूरा होने पर किसी धार्मिक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दान दें।
इसके बाद ब्राह्मणों को खाना खिलाएं और दक्षिणा दें। ब्राह्मणों से कहलवाएं कि व्रत पूरा हुआ। ब्राह्मणों की आज्ञा लेकर अपने परिवार वालों के साथ भगवान शंकर को याद करते हुए भोजन करें।
इस तरह व्रत का समापन करने से व्रत रखने वाले को पुत्र-पौत्र की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। साथ ही दुश्मनों पर जीत मिलती है और सभी पापों से छुटकारा मिलता है। यह स्कंद पुराण में लिखा गया है।
**त्रयोदशी व्रत क्यों महत्वपूर्ण है:**
त्रयोदशी यानी प्रदोष व्रत करने वाला व्यक्ति हमेशा खुश रहता है। इस व्रत के प्रभाव से सभी पापों का नाश हो जाता है। यह व्रत करने से विधवा स्त्रियों को अधर्म से घृणा होती है और सुहागन स्त्रियों का सुहाग स्थिर रहता है। कैदी को जेल से मुक्ति मिलती है।
जो स्त्री-पुरुष जिस इच्छा से यह व्रत रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं कैलाश के स्वामी भगवान शंकर पूरी करते हैं। सूत जी बताते हैं कि त्रयोदशी व्रत करने वाले को सौ गायों के दान जितना पुण्य मिलता है।
इस व्रत को जो सही तरीके से और पूरे मन से करता है, उसके सभी दुख दूर हो जाते हैं। सभी महिलाओं को ग्यारह त्रयोदशी या पूरे साल की २६ त्रयोदशी पूरी करने के बाद उद्यापन करना चाहिए।
**प्रदोष व्रत में दिनों का महत्व:**
त्रयोदशी तिथि पर जो भी दिन पड़ता है, उसी दिन के हिसाब से व्रत करना चाहिए और उसी दिन की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। खासतौर पर रविवार, सोमवार और शनिवार के प्रदोष व्रत जरूर करने चाहिए। इन सभी से मनचाहा फल मिलता है।
**अलग-अलग दिनों के प्रदोष व्रत:**
१. **रविवार का प्रदोष व्रत** - लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रविवार प्रदोष व्रत रखें।
२. **सोमवार का प्रदोष व्रत** - ग्रहों की खराब दशा दूर करने के लिए सोमवार प्रदोष व्रत करें।
३. **मंगलवार का प्रदोष व्रत** - बीमारियों से छुटकारा और स्वास्थ्य के लिए मंगलवार प्रदोष व्रत रखें।
४. **बुधवार का प्रदोष व्रत** - सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए बुधवार प्रदोष व्रत करें।
५. **गुरुवार का प्रदोष व्रत** - दुश्मनों के नाश के लिए गुरुवार प्रदोष व्रत रखें।
६. **शुक्रवार का प्रदोष व्रत** - सौभाग्य और स्त्री की समृद्धि के लिए शुक्रवार प्रदोष व्रत करें।
७. **शनिवार का प्रदोष व्रत** - खोया राज्य और पद पाने के लिए शनिवार प्रदोष व्रत रखें।
**व्रत से क्या लाभ होता है:**
प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को ये लाभ मिलते हैं:
• सभी पापों से मुक्ति मिलती है
• धन-दौलत की प्राप्ति होती है
• संतान का सुख मिलता है
• अच्छा स्वास्थ्य मिलता है
• दुश्मनों पर विजय मिलती है
• मनोकामनाएं पूरी होती हैं
• जेल से छुटकारा मिलता है
• सुहाग स्थिर रहता है
• राज्य और पद की प्राप्ति होती है
**जरूरी बातें:**
- व्रत के दिन कुछ नहीं खाएं
- प्रदोष काल में पूजा जरूर करें
- सफेद कपड़े पहनें
- बेल पत्र जरूर चढ़ाएं
- ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें
- ब्राह्मणों को खाना और दक्षिणा दें
- कथा जरूर सुनें
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