श्री लक्ष्मीनारायण स्तोत्र / नमो नारायण (short stotras) | Lakshmi‑Narayana — मंत्र व पाठ
श्री लक्ष्मीनारायण का संक्षिप्त जप श्री विष्णु‑नारायण और लक्ष्मी‑देवी के सम्मिलित आशीर्वाद के लिये किया जाता है। छोटे‑स्तोत्र और ...
पढ़ें →विष्णु सहस्रनाम भगवान विष्णु के एक हजार नामों का स्तोत्र है। महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म ने युधिष्ठिर को सुनाया। संस्कृत का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। प्रत्येक नाम विष्णु के गुणों का वर्णन करता है। गुरुवार और एकादशी को पाठ विशेष फलदायी है। एक घंटे में पूर्ण पाठ हो जाता है। नियमित पाठ से विष्णु की कृपा और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
Transliteration: Om Namo Bhagavate Vāsudevāya
विष्णु सहस्रनाम का नियमित पाठ और उपर्युक्त समर्पण‑मंत्र जप पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार कई प्रकार के आध्यात्मिक और मानसिक लाभ देते हैं: यह संकटों से रक्षा, मन की गहन शांति, भय‑दुःख में कमी और धर्म‑पथ पर अटलता बढ़ाने में सहायक माना जाता है; शास्त्रीय कथा अनुसार भीष्म समेत अनेक पुराणिक साधकों ने इसे संकटमोचन के रूप में उद्धृत किया है। समर्पण‑मंत्र (Om Namo Bhagavate Vāsudevāya) का उच्चारण पाठ की ऊर्जा को केन्द्रित करता है और पाठ से पहले 3×/7×/108× कहने से मन शुद्ध एवं एकाग्र होता है; विष्णु गायत्री (Om Sarva‑śaktimāyai …) का जप ध्यान‑क्षमता, ज्ञान और भक्ति‑प्रेरणा बढ़ाता है, तथा शांति‑मंत्र (Om Namaḥ Śaṃ No Namaḥ) पाठ के दौरान वातावरण में संतुलन और शान्ति बनाए रखता है। व्यावहारिक रूप से, नियमितता (प्रतिदिन या साप्ताहिक), सही उच्चारण, 108‑माला का प्रयोग और ब्रह्ममुहूर्त या प्रातः काल में पाठ करने से अनुभविक प्रभाव तेज़ होते हैं; कठिनाइयों या मानसिक अशान्ति में समूह‑पाठ, गुरु‑निर्देश या मत्स्यानीन (पुजारी) के मार्गदर्शन से कराना श्रेष्ठ रहता है। सहस्रनाम का अर्थ समझते हुए पढ़ना (हिंदी/सांस्कृत अर्थ के साथ) पाठ के आध्यात्मिक लाभ को गहरा करता है—यह पारिवारिक कल्याण, आध्यात्मिक स्थिरता और दीर्घकालिक मानसिक सन्तुलन के लिये एक सशक्त साधन माना जाता है।
ॐ सर्वशक्तिमायै च विद्महे विष्णुम् विराट् धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥
Transliteration: Om Sarva‑śaktimāyai cha vidmahe Viṣṇum Virāt dhīmahi tanno Viṣṇuḥ prachodayāt
उपयोग: विष्णु गायत्री — ध्यान, ज्ञान‑प्रेरणा और पाठ के केंद्रित जप के लिये; सामान्यतः 108× जपा जाता है।
ॐ नमः शं नो नमः॥
Transliteration: Om Namaḥ Śaṃ No Namaḥ
उपयोग: शांति‑संकल्प/शान्ति‑मंत्र के रूप में पाठ में जोड़ा जाता है; पाठ के दौरान या समापन पर 3×/11× कहा जा सकता है।
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