प्रदोष व्रत कथा संग्रह - भगवान शंकर की भक्ति और आशीर्वाद

हिंदू धर्म में त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत का बहुत खास महत्व है। यह व्रत हफ्ते के किसी भी दिन हो सकता है और हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है। प्रदोष यानी शाम का समय जब सूरज डूब जाता है और रात शुरू होने वाली होती है। यह समय भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। रविवार प्रदोष लंबी उम्र के लिए, सोमवार प्रदोष ग्रहों की शांति के लिए, मंगलवार प्रदोष सेहत के लिए, बुधवार प्रदोष इच्छा पूर्ति के लिए, गुरुवार प्रदोष दुश्मन नाश के लिए, शुक्रवार प्रदोष भाग्य के लिए और शनिवार प्रदोष राज्य-पद के लिए फलदायी है। यहां आपको सभी सात दिनों की प्रदोष व्रत कथाएं, विधि और लाभ मिलेंगे। भगवान शंकर की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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प्रदोष व्रत क्या है | प्रदोष व्रत की पूर्ण जानकारी

प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि पर किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है। प्रदोष का अर्थ है सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पूर्व का समय। इस का...

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बृहस्पतिवार प्रदोष कथा | गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत की कथा देवताओं और वृत्रासुर की लड़ाई से जुड़ी है। वृत्रासुर पहले चित्ररथ नाम का राजा था जिसे माता पार्वती ने...

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