शीतला माता बसोड़ा – ठंडे भोजन और स्वास्थ्य का पर्व

शीतला माता बसोड़ा या शीतला अष्टमी हिंदू धर्म का एक खास पर्व है जो माता शीतला को समर्पित है। यह त्योहार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाया जाता है, जो होली के करीब एक हफ्ते बाद आता है। शीतला माता को चेचक, बुखार और दूसरी छूत की बीमारियों से बचाने वाली देवी माना जाता है। बसोड़ा का मतलब है 'बासी भोजन' - इस दिन की सबसे अनोखी बात यह है कि एक दिन पहले यानी सप्तमी को सभी खाने-पीने की चीजें बना ली जाती हैं और अष्टमी के दिन चूल्हा बिल्कुल नहीं जलाया जाता। अष्टमी के दिन सिर्फ ठंडा या बासी खाना खाया जाता है और शीतला माता की पूजा की जाती है। माता शीतला को ठंडा खाना, ठंडा पानी और ठंडी चीजें चढ़ाई जाती हैं। इस व्रत को करने से घर के सभी लोग बीमारियों से बचे रहते हैं और माता शीतला की कृपा बनी रहती है।

शीतला माता बसोड़ा | शीतला अष्टमी पूजा और कथा

Hindu Calendar Vrat Katha चैत्र (Chaitra) त्योहार विशेष (Festivals) धार्मिक कथाएँ (Religious Stories) पूजा विधि (Puja Vidhi) व्रत एवं उपवास (Fasting & Vrat)
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परिचय

शीतला माता बसोड़ा या शीतला अष्टमी माता शीतला को समर्पित एक खास पर्व है जो चैत्र कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है। शीतला माता चेचक, बुखार और छूत की बीमारियों से बचाने वाली देवी हैं। इस दिन की सबसे खास बात यह है कि एक दिन पहले (सप्तमी) को सारा खाना बना लिया जाता है और अष्टमी के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता। सिर्फ ठंडा या बासी खाना खाया जाता है। इसलिए इसे बसोड़ा (बासी भोजन का त्योहार) कहते हैं। माता शीतला को ठंडे पानी, ठंडे खाने और फूलों से पूजा जाती है। इस व्रत को करने से परिवार में बीमारियां नहीं आतीं और माता की कृपा बनी रहती है।
Sheetala Mata Basoda or Sheetala Ashtami is a special festival dedicated to Mata Sheetala, celebrated on Chaitra Krishna Ashtami. Sheetala Mata is the goddess who protects from smallpox, fever and contagious diseases. The most special thing about this day is that all food is cooked the previous day (Saptami) and no stove is lit on Ashtami. Only cold or stale food is eaten. That's why it is called Basoda (festival of stale food). Mata Sheetala is worshipped with cold water, cold food and flowers. Observing this fast prevents diseases in the family and maintains the blessings of Mata.

शीतला माता बसोड़ा | शीतला अष्टमी पूजा और कथा

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🙏 शीतला माता बसोड़ा 🙏

**बसोड़ा क्या होता है:**

बसोड़ा, जिसे शीतला अष्टमी भी कहते हैं, माता शीतला को समर्पित एक पवित्र पर्व है। यह चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है, जो होली के करीब सात-आठ दिन बाद आता है।

'बसोड़ा' शब्द 'बासी' से बना है, क्योंकि इस दिन सिर्फ बासी या ठंडा खाना खाया जाता है। 'शीतला' का मतलब है 'ठंडक देने वाली' या 'शीतलता देने वाली'।

**शीतला माता कौन हैं:**

माता शीतला सेहत और ठंडक की देवी हैं। उन्हें चेचक (माता), खसरा, बुखार और दूसरी छूत की बीमारियों से बचाने वाली देवी माना जाता है।

**शीतला माता कैसी दिखती हैं:**
- माता शीतला गधे पर बैठी होती हैं
- हाथ में कलश (पानी का घड़ा) होता है
- सूप (winnowing fan) रखती हैं
- झाड़ू या नीम की डाल होती है
- ठंडे पानी से भरा कलश धारण करती हैं

माता शीतला को ठंडी चीजों से पूजा जाती है - ठंडा पानी, ठंडा खाना, ठंडे फूल आदि।

**बसोड़ा कब मनाते हैं:**

बसोड़ा दो दिन का पर्व है:

**सप्तमी (एक दिन पहले):**
- इस दिन सारा खाना बना लिया जाता है
- सभी तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं
- घर की सफाई होती है
- अगले दिन की तैयारी की जाती है

**अष्टमी (असली दिन):**
- चूल्हा बिल्कुल नहीं जलाया जाता
- सिर्फ ठंडा/बासी खाना खाया जाता है
- शीतला माता की पूजा की जाती है
- मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं

**बसोड़ा क्यों मनाते हैं:**

**१. बीमारियों से बचाव:**
शीतला माता चेचक, खसरा, बुखार जैसी बीमारियों से बचाती हैं। होली के बाद मौसम बदलता है और छूत की बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। इसलिए माता की पूजा करके उनकी कृपा मांगी जाती है।

**२. साफ-सफाई का संदेश:**
चूल्हा न जलाने से घर में गर्मी और धुआं नहीं होता। यह सफाई और ठंडक का प्रतीक है।

**३. आराम का दिन:**
यह औरतों के लिए आराम का दिन है। एक दिन बिना खाना बनाए आराम कर सकती हैं।

**शीतला माता की कथाएं:**

**कथा १ - माता शीतला का प्रकट होना:**

बहुत पुराने समय में एक गांव में चेचक की खतरनाक बीमारी फैल गई। बहुत सारे लोग बीमार हो गए और कई लोगों की मौत हो गई। गांव के लोग बहुत परेशान थे।

गांव के एक ब्राह्मण ने माता की पूजा की। उसकी भक्ति से खुश होकर माता शीतला प्रकट हुईं। उन्होंने अपने हाथ में ठंडे पानी का कलश लेकर पूरे गांव में पानी का छिड़काव किया।

माता के ठंडे पानी के छूते ही सभी मरीज ठीक हो गए। तभी से लोग माता शीतला की पूजा करने लगे और उन्हें बीमारियों से बचाने वाली देवी के रूप में पूजा जाने लगा।

**कथा २ - शीतला माता और राजा की कहानी:**

एक बार की बात है, एक राज्य में राजा के बेटे को चेचक निकल आया। राजा ने सभी वैद्यों को बुलाया लेकिन कोई इलाज काम नहीं आया। राजकुमार की हालत बिगड़ती जा रही थी।

राजा की रानी बहुत चिंतित थी। उसने माता शीतला की पूजा शुरू की। उसने व्रत रखा और पूरे दिल से माता की आराधना की।

माता शीतला रानी की भक्ति से खुश हुईं। उन्होंने राजकुमार को ठीक कर दिया। राजा और रानी ने माता शीतला का बड़ा मंदिर बनवाया और तभी से हर साल बसोड़ा का पर्व धूमधाम से मनाया जाने लगा।

**कथा ३ - बासी खाने की परंपरा:**

एक बार की बात है, एक गांव में शीतला माता की भक्त एक गरीब औरत रहती थी। उसके घर में छोटे-छोटे बच्चे थे। शीतला अष्टमी के दिन वह माता की पूजा करना चाहती थी, लेकिन उसके पास पूजा के लिए कुछ भी नहीं था।

उसके पास पिछले दिन का बचा हुआ बासी खाना था। उसने वही बासी खाना माता को भोग लगाया और पूरे मन से प्रार्थना की।

माता शीतला उसकी सच्ची भक्ति से बहुत खुश हुईं। उन्होंने उस औरत को दर्शन दिए और कहा - "बेटी, मुझे तुम्हारी श्रद्धा पसंद है। आज से बासी खाना मुझे बहुत प्रिय है। जो भी मुझे ठंडा या बासी खाना चढ़ाएगा, मैं उसकी सभी मुरादें पूरी करूंगी।"

तभी से बसोड़ा के दिन बासी खाना खाने और माता को चढ़ाने की परंपरा चल पड़ी।

**बसोड़ा पूजा कैसे करें:**

**सप्तमी के दिन (एक दिन पहले):**

**१. खाना बनाना:**
सप्तमी के दिन सारा खाना बना लें जो अगले दिन खाना है:
- पूरी (तली हुई रोटी)
- आलू की सब्जी
- चने की सब्जी
- हलवा या शीरा
- खीर या मीठी चीजें
- पापड़
- अचार
- दही (अगर मौसम ठंडा हो)

**२. घर की सफाई:**
- पूरे घर की सफाई करें
- चूल्हे/रसोई को साफ करें
- पूजा की जगह सजाएं

**३. सामान तैयार करना:**
अगले दिन की पूजा का सामान तैयार रखें।

**अष्टमी के दिन (असली दिन):**

**पूजा का सामान:**
- शीतला माता की फोटो या मूर्ति
- कलश - ठंडे पानी से भरा
- फूल (खासकर सफेद फूल)
- नीम के पत्ते
- चंदन
- रोली, चावल
- धूप, दीप
- नारियल
- बासी खाना (पूरी, सब्जी, हलवा)
- मिठाई
- फल
- गुड़
- घी
- सूप
- नए कपड़े का टुकड़ा

**पूजा कैसे करें:**

**१. सुबह:**
- सुबह जल्दी उठें
- नहाएं
- साफ कपड़े पहनें
- चूल्हा बिल्कुल न जलाएं

**२. पूजा की जगह तैयार करना:**
- शीतला माता की फोटो या मूर्ति रखें
- सामने कलश रखें (ठंडे पानी से भरा)
- कलश पर नारियल रखें
- नीम के पत्ते रखें

**३. पूजा शुरू करना:**
- माता को पानी चढ़ाएं (ठंडा पानी)
- फूल चढ़ाएं
- चंदन लगाएं
- रोली, चावल चढ़ाएं
- धूप-दीप दिखाएं

**४. भोग लगाना:**
- बासी पूरी, सब्जी, हलवा माता को चढ़ाएं
- मिठाई, फल चढ़ाएं
- ठंडा पानी चढ़ाएं

**५. मंत्र:**

**शीतला माता मंत्र:**
ॐ शीतलायै नमः
या
शीतले त्वं जगद्धात्री, शीतला त्वं जगत्प्रिया।

**६. आरती:**
शीतला माता की आरती करें।

**७. प्रसाद बांटना:**
आरती के बाद बासी खाना सभी को प्रसाद दें।

**८. मंदिर जाना:**
शीतला माता के मंदिर में दर्शन के लिए जाएं।

**बसोड़ा में क्या-क्या बनाएं:**

**मुख्य खाने की चीजें:**

**१. पूरी:**
- गेहूं के आटे की पूरी
- मैदा की पूरी
- बेसन की पूरी

**२. सब्जियां:**
- आलू की सूखी सब्जी
- चने की सब्जी
- गोभी-आलू
- मटर-पनीर
- आलू-टमाटर

**३. मीठी चीजें:**
- हलवा (सूजी या आटे का)
- खीर
- गुड़ की खीर
- लड्डू
- मालपुआ
- गुझिया

**४. दूसरी चीजें:**
- पापड़ (भुने हुए)
- अचार
- चटनी
- दही (अगर ठंडा मौसम हो)
- रायता

**५. पीने की चीजें:**
- ठंडाई
- शरबत
- नींबू पानी
- मीठा दूध

**खास बातें:**

**सावधानियां:**
- सप्तमी के दिन सुबह से खाना बनाना शुरू करें
- ऐसा खाना बनाएं जो अगले दिन भी ठीक रहे
- अष्टमी के दिन बिल्कुल चूल्हा न जलाएं
- सिर्फ ठंडा खाना खाएं
- चाय-कॉफी भी न बनाएं

**क्या न करें:**
- आग से जुड़ा कोई काम न करें
- गर्म खाना न बनाएं
- गर्म पानी न गर्म करें

**बसोड़ा के फायदे:**

१. **सेहत के फायदे:**
- चेचक और छूत की बीमारियों से बचाव
- बुखार से सुरक्षा
- त्वचा की बीमारियों से रक्षा
- घर के सभी लोग स्वस्थ रहते हैं

२. **धार्मिक फायदे:**
- माता शीतला की कृपा
- घर में शांति
- बीमारियां दूर रहती हैं
- मनोकामना पूरी होती है

३. **सामाजिक फायदे:**
- औरतों को आराम मिलता है
- परिवार साथ में खाता है
- पड़ोसियों में प्रसाद बांटने से संबंध अच्छे होते हैं

४. **पर्यावरण के फायदे:**
- एक दिन ईंधन की बचत
- धुआं नहीं होता
- पर्यावरण को आराम मिलता है

**शीतला माता के मंदिर:**

भारत में कई मशहूर शीतला माता के मंदिर हैं:
- गुरुग्राम, हरियाणा
- गुड़गांव
- राजस्थान के अलग-अलग शहर
- उत्तर प्रदेश
- बिहार

**जरूरी जानकारी:**

- बसोड़ा मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है
- राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार में यह पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है
- कुछ जगहों पर इसे 'बासोड़ा' या 'बसौड़ा' भी कहते हैं
- यह होली के बाद का पहला बड़ा त्योहार है

**जरूरी बातें:**

- सप्तमी के दिन अच्छे से खाना बनाएं
- अष्टमी के दिन आग से दूर रहें
- पूरे परिवार के साथ मिलकर पूजा करें
- बासी खाने को प्यार से खाएं
- शीतला माता का ध्यान करें
- मंदिर में जरूर जाएं
- पड़ोसियों और गरीबों में प्रसाद बांटें

🙏 जय माता शीतला 🙏
🙏 शीतलायै नमः 🙏