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परिचय
खाटू श्याम बाबा महाभारत युग के महान वीर बर्बरीक के रूप में विख्यात हैं। वे पांडव भीम के पौत्र एवं घटोत्कच के पुत्र थे। बर्बरीक के पास तीन अमोघ बाण थे जिनकी शक्ति से वे समस्त संसार को जीत सकते थे। महाभारत के युद्ध में सम्मिलित होने जाते समय मार्ग में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का रूप धारण कर उनकी परीक्षा ली। बर्बरीक ने कहा था कि वे कमजोर पक्ष का साथ देंगे। भगवान कृष्ण जानते थे कि इससे युद्ध का अंत नहीं होगा। उन्होंने बर्बरीक से दान में उनका शीश मांग लिया। बर्बरीक ने हर्षपूर्वक अपना मस्तक दान कर दिया। प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने आशीर्वाद दिया कि कलियुग में तुम्हारी पूजा श्याम नाम से होगी।
Khatu Shyam Baba is famous as the great warrior Barbarik from the Mahabharata era. He was the grandson of Pandava Bhima and son of Ghatotkacha. Barbarik possessed three invincible arrows with which he could conquer the entire world. While going to participate in the Mahabharata war, Lord Shri Krishna took the form of a Brahmin and tested him. Barbarik said he would support the weaker side. Lord Krishna knew this would not end the war. He asked for Barbarik's head as charity. Barbarik joyfully donated his head. Pleased, Lord Krishna blessed that in Kaliyug you will be worshipped as Shyam.
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खाटू श्याम बाबा की कथा | बर्बरीक की अमर गाथा
🙏 खाटू श्याम बाबा की कथा 🙏
**खाटू श्याम बाबा कौन हैं:**
खाटू श्याम बाबा, जिन्हें बर्बरीक के नाम से भी पुकारा जाता है, महाभारत काल के एक अद्वितीय योद्धा थे। वे महान पांडव भीम के पौत्र और राक्षसराज घटोत्कच के पुत्र थे। उनकी माता का नाम मौर्वी था जो एक यक्ष राजकुमारी थीं।
बर्बरीक बचपन से ही असाधारण शक्ति और पराक्रम के धनी थे। उन्होंने भगवान शिव और माता दुर्गा की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें तीन अमोघ बाण दिए। माता दुर्गा ने उन्हें एक दिव्य धनुष प्रदान किया।
**तीन अमोघ बाणों का रहस्य:**
बर्बरीक को जो तीन बाण मिले थे, वे साधारण बाण नहीं थे। ये अलौकिक शक्तियों से युक्त थे:
**प्रथम बाण:** यह बाण उन सभी चीजों को चिह्नित कर देता था जिन्हें बर्बरीक नष्ट करना चाहते थे।
**द्वितीय बाण:** यह बाण उन सभी चीजों को चिह्नित कर देता था जिन्हें बर्बरीक बचाना चाहते थे।
**तृतीय बाण:** यह बाण प्रथम बाण द्वारा चिह्नित सभी चीजों को नष्ट कर देता था और फिर स्वतः बर्बरीक के तूणीर में लौट आता था।
इन तीन बाणों की ताकत इतनी अधिक थी कि बर्बरीक अकेले ही पूरे महाभारत युद्ध को पलभर में समाप्त कर सकते थे। वे मात्र तीन बाणों से पूरी सृष्टि को जीत सकते थे।
**युद्ध में जाने का निर्णय:**
जब कुरुक्षेत्र में महाभारत का महायुद्ध होने वाला था, तब बर्बरीक ने भी युद्ध में भाग लेने का फैसला किया। उनकी माता मौर्वी ने पूछा - "पुत्र, तुम किसके पक्ष में युद्ध करोगे - कौरवों के पक्ष में या पांडवों के पक्ष में?"
बर्बरीक ने जवाब दिया - "माता, मैं किसी एक पक्ष का साथ नहीं दूंगा। मैंने संकल्प लिया है कि मैं हमेशा कमजोर और हारते हुए पक्ष का साथ दूंगा। जो भी पक्ष कमजोर होगा, मैं उसकी मदद करूंगा।"
माता मौर्वी ने उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा - "बेटा, तुम्हारा संकल्प बहुत श्रेष्ठ है। परंतु युद्ध में जाने से पहले अपने इष्टदेव भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन अवश्य कर लेना।"
बर्बरीक ने माता को प्रणाम किया और अपने दिव्य धनुष, तीन बाण तथा नीले घोड़े पर सवार होकर कुरुक्षेत्र के लिए निकल पड़े।
**ब्राह्मण रूपी श्री कृष्ण:**
रास्ते में बर्बरीक को एक ब्राह्मण मिले। ये ब्राह्मण और कोई नहीं बल्कि साक्षात भगवान श्रीकृष्ण थे जिन्होंने ब्राह्मण का वेश धारण किया था।
ब्राह्मण ने बर्बरीक से पूछा - "हे वीर पुरुष, तुम कौन हो और कहां जा रहे हो?"
बर्बरीक ने विनम्रता से उत्तर दिया - "मैं घटोत्कच का पुत्र बर्बरीक हूं। मैं महाभारत के युद्ध में भाग लेने कुरुक्षेत्र जा रहा हूं।"
ब्राह्मण ने कहा - "मैं देख रहा हूं कि तुम्हारे तूणीर में केवल तीन बाण हैं। इतने विशाल युद्ध में तुम मात्र तीन बाणों से क्या कर लोगे?"
बर्बरीक मुस्कराए और बोले - "हे ब्राह्मण श्रेष्ठ, ये साधारण बाण नहीं हैं। ये तीन अमोघ बाण हैं जिनसे मैं पूरे संसार को जीत सकता हूं। यदि जरूरत पड़ी तो मैं केवल एक बाण से ही पूरा युद्ध खत्म कर सकता हूं।"
**बाणों की शक्ति का प्रदर्शन:**
ब्राह्मण ने कहा - "मुझे तुम्हारे बाणों की शक्ति पर भरोसा नहीं है। क्या तुम मुझे इनकी ताकत दिखा सकते हो?"
बर्बरीक ने कहा - "जरूर, आप जैसी चाहें परीक्षा ले सकते हैं।"
ब्राह्मण ने एक पीपल के विशाल वृक्ष की ओर इशारा किया और कहा - "इस वृक्ष के सभी पत्तों को अपने बाण से बेध दो।"
बर्बरीक ने अपना एक बाण धनुष पर रखा और मंत्रोच्चारण करके छोड़ दिया। वह बाण अत्यंत तीव्र गति से चला और उसने पीपल के वृक्ष के हर एक पत्ते को बेध दिया। इतना ही नहीं, वह बाण घूम-घूमकर प्रत्येक पत्ते को छेदता रहा।
भगवान कृष्ण ने चुपचाप एक पत्ता तोड़कर अपने चरण के नीचे छिपा लिया था। जब बाण ने सभी पत्तों को बेध दिया तो वह भगवान कृष्ण के चरण के पास मंडराने लगा।
बर्बरीक ने कहा - "हे ब्राह्मण देवता, कृपया अपना चरण हटाइए। एक पत्ता आपके चरण के नीचे है जिसे मेरे बाण को बेधना है। यदि आपने चरण नहीं हटाया तो मेरा बाण आपके चरण को भी बेध देगा।"
यह देखकर भगवान कृष्ण समझ गए कि बर्बरीक कितने महान योद्धा हैं।
**बर्बरीक की प्रतिज्ञा:**
ब्राह्मण रूपी भगवान कृष्ण ने पूछा - "तुम किस पक्ष का साथ दोगे?"
बर्बरीक ने कहा - "मैंने प्रतिज्ञा की है कि मैं हमेशा हारते हुए और कमजोर पक्ष की मदद करूंगा। युद्ध में जो पक्ष कमजोर पड़ेगा, मैं उसका साथ दूंगा।"
यह सुनकर भगवान कृष्ण चिंता में पड़ गए। उन्होंने सोचा कि यदि बर्बरीक इस तरह कमजोर पक्ष का साथ देते रहे तो युद्ध कभी खत्म नहीं होगा। जब एक पक्ष कमजोर होगा तो बर्बरीक उसकी मदद करेंगे और वह पक्ष ताकतवर हो जाएगा। फिर दूसरा पक्ष कमजोर हो जाएगा और बर्बरीक उसका साथ देने लगेंगे। इस तरह यह युद्ध हमेशा चलता रहेगा।
इसके अलावा, बर्बरीक इतने शक्तिशाली थे कि वे अकेले ही कौरव और पांडव दोनों सेनाओं को खत्म कर सकते थे। अगर वे युद्ध में भाग लेते तो सभी योद्धा मारे जाते और युद्ध का असली मकसद पूरा नहीं होता।
**शीश दान की याचना:**
भगवान कृष्ण ने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया और बर्बरीक से कहा - "हे महान योद्धा बर्बरीक, तुम बहुत शक्तिशाली हो। लेकिन तुम्हारी प्रतिज्ञा के कारण यह युद्ध कभी खत्म नहीं हो सकता। इसके अलावा, तुम्हारी शक्ति इतनी ज्यादा है कि तुम अकेले ही सभी योद्धाओं को मार सकते हो।"
भगवान कृष्ण ने आगे कहा - "इस युद्ध का मकसद धरती पर धर्म की स्थापना करना है। यह युद्ध होना जरूरी है और इसमें जो होना है वह होना चाहिए। मैं तुमसे एक दान मांगता हूं।"
बर्बरीक ने तुरंत कहा - "हे प्रभु, आप मुझसे जो चाहें मांग सकते हैं। मैं अपना सब कुछ आपको देने के लिए तैयार हूं।"
भगवान कृष्ण ने कहा - "मुझे तुम्हारा शीश (सिर) दान में चाहिए।"
**बर्बरीक का महान त्याग:**
यह सुनकर बर्बरीक जरा भी परेशान नहीं हुए। उन्होंने खुशी से कहा - "हे प्रभु, यह तो मेरा सौभाग्य है कि आप मुझसे दान मांग रहे हैं। मैं अपना शीश आपको देकर धन्य हो जाऊंगा।"
लेकिन बर्बरीक ने एक विनती की - "हे प्रभु, मैं महाभारत का युद्ध देखना चाहता हूं। कृपया मुझे यह वरदान दें कि मैं युद्ध देख सकूं।"
भगवान कृष्ण ने खुश होकर कहा - "तथास्तु। तुम्हारा शीश कुरुक्षेत्र की एक पहाड़ी पर रखा जाएगा जहां से तुम पूरा युद्ध देख सकोगे।"
बर्बरीक ने अपनी तलवार निकाली और खुद अपना सिर काटकर भगवान कृष्ण को समर्पित कर दिया। यह देखकर सभी देवता हैरान रह गए।
**भगवान कृष्ण का आशीर्वाद:**
बर्बरीक के इस महान त्याग और बलिदान से भगवान कृष्ण बहुत खुश हुए। उन्होंने बर्बरीक के मस्तक से कहा:
"हे महावीर बर्बरीक, तुम्हारे इस अद्भुत त्याग और बलिदान से मैं बहुत प्रसन्न हूं। मैं तुम्हें आशीर्वाद देता हूं:
१. तुम्हारा यह शीश अमर रहेगा।
२. पूरा महाभारत युद्ध तुम इसी शीश से देख पाओगे।
३. कलियुग में लोग तुम्हारी पूजा मेरे नाम 'श्याम' से करेंगे।
४. तुम 'खाटू श्याम' के नाम से जाने जाओगे।
५. तुम्हारे भक्तों की सभी मुरादें पूरी होंगी।
६. तुम 'हारे का सहारा' कहलाओगे और कमजोरों की रक्षा करोगे।
७. जो भी सच्चे दिल से तुम्हारी पूजा करेगा, उसके सभी दुख दूर होंगे।"
**युद्ध समाप्ति के बाद:**
महाभारत युद्ध खत्म होने के बाद पांडवों में बहस हो गई कि युद्ध में सबसे बड़ा योद्धा कौन था। सभी अपनी-अपनी बहादुरी बता रहे थे।
तब भगवान कृष्ण ने बर्बरीक के मस्तक को बुलवाया और कहा - "हे बर्बरीक, तुमने पूरा युद्ध देखा है। तुम बताओ कि सबसे बड़ा योद्धा कौन था?"
बर्बरीक के मस्तक ने जवाब दिया - "हे प्रभु, मैंने केवल आपके सुदर्शन चक्र को युद्ध करते देखा। मैंने देखा कि आपका चक्र सभी योद्धाओं को काट रहा था। मैंने माता महाकाली को भी देखा जो योद्धाओं का खून पी रही थीं। असल में यह युद्ध आपने अकेले ही लड़ा।"
यह सुनकर सभी पांडव भगवान कृष्ण के चरणों में गिर पड़े और उनसे माफी मांगी।
**खाटू धाम की स्थापना:**
महाभारत युद्ध के बाद बर्बरीक का मस्तक एक नदी में बहता हुआ राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में पहुंचा।
उस समय खाटू गांव में दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा था। गांव की एक औरत दूध का बर्तन लेकर जा रही थी। अचानक वह दूध का बर्तन उसके हाथ से छूटकर एक जगह पर गिर गया। जब उसने देखा तो वहां जमीन से दूध निकल रहा था।
गांववालों ने उस जगह को खोदा तो उन्हें बर्बरीक का दिव्य मस्तक मिला। उसी रात बर्बरीक स्वप्न में गांव के ब्राह्मण रूपाराम व्यास के पास आए और कहा कि मैं बर्बरीक हूं और मेरा मस्तक यहां स्थापित करो।
ब्राह्मण ने वैसा ही किया और एक मंदिर बनवाया। तभी से खाटू धाम में खाटू श्याम जी के मस्तक की पूजा होती है।
**खाटू श्याम बाबा की महिमा:**
खाटू श्याम बाबा अपने भक्तों पर बहुत कृपालु हैं। उन्हें "हारे का सहारा" कहा जाता है। जो भक्त सच्चे दिल से उनकी शरण में आता है, वे उसकी सभी मुश्किलों का हल करते हैं।
**मशहूर कहावत:**
"हारे का सहारा, खाटू वाला श्याम हमारा"
यह कहावत खाटू श्याम बाबा की महिमा बताती है। वे खासतौर पर उन भक्तों की मदद करते हैं जो जिंदगी में हार गए हैं, जो निराश हैं, जिनका कोई सहारा नहीं है।
**फाल्गुन का मेला:**
हर साल फाल्गुन महीने में खाटू धाम में बहुत बड़ा मेला लगता है। फाल्गुन शुक्ल एकादशी से फाल्गुन शुक्ल द्वादशी तक यह मेला चलता है। इस मेले में लाखों भक्त देश-दुनिया से खाटू श्याम बाबा के दर्शन के लिए आते हैं।
भक्त "श्याम बाबा की जय" और "खाटू नरेश की जय" के नारे लगाते हुए मंदिर में जाते हैं। मंदिर में भजन-कीर्तन होता है और भक्त झूमकर नाचते हैं।
**खाटू श्याम बाबा की पूजा कैसे करें:**
१. सुबह नहाकर साफ कपड़े पहनें
२. खाटू श्याम बाबा की फोटो या मूर्ति रखें
३. धूप-दीप जलाएं
४. फूल, फल, मिठाई चढ़ाएं
५. "ॐ श्याम देवाय नमः" मंत्र बोलें
६. खाटू श्याम बाबा के भजन गाएं
७. आरती करें
८. प्रसाद बांटें
**मशहूर भजन:**
- "श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम"
- "मोर मुकुट पीताम्बर सोहे"
- "खाटू वाले श्याम बाबा"
- "तेरे दर पे आया हूं, श्याम तेरी शरण आया हूं"
**खाटू श्याम बाबा के दर्शन के फायदे:**
१. सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं
२. जिंदगी के दुख दूर होते हैं
३. पैसों की दिक्कत खत्म होती है
४. घर में शांति आती है
५. दुश्मनों से बचाव होता है
६. मन को शांति मिलती है
७. बीमारियों से छुटकारा मिलता है
८. संतान का सुख मिलता है
९. नौकरी-व्यापार में तरक्की होती है
१०. कोर्ट-कचहरी के झगड़े खत्म होते हैं
**जरूरी बातें:**
- खाटू श्याम बाबा बहुत जल्दी खुश होते हैं
- उन्हें सच्ची भक्ति पसंद है
- झूठे और धोखेबाज भक्तों को वे पसंद नहीं करते
- फाल्गुन महीने में उनकी खास पूजा होती है
- शनिवार का दिन उनके लिए खास है
- जो भी सच्चे दिल से बुलाता है, श्याम बाबा जरूर आते हैं
**श्याम बाबा के चमत्कार:**
खाटू श्याम बाबा के अनगिनत चमत्कार हुए हैं। भक्तों की मुश्किल घड़ी में श्याम बाबा खुद मदद करने आ जाते हैं। कई लोगों ने बताया है कि जब वे बहुत परेशानी में थे तो श्याम बाबा ने उनकी मदद की।
- बीमार लोग ठीक हो गए
- गरीब लोगों को धन मिला
- बेरोजगारों को नौकरी मिली
- झगड़े सुलझ गए
- संतान की प्राप्ति हुई
🙏 श्याम बाबा की जय 🙏
🙏 खाटू नरेश की जय 🙏
🙏 हारे का सहारा श्याम हमारा 🙏