एकादशी आरती (Ekadashi Aarti)
एकादशी माता का व्रत और पूजा विष्णु‑भक्तों में विशेष स्थान रखती है। एकादशी के दिन उपवास, नियम और भक्ति से मन और इन्द्रियाँ सहज हो जाती ...
पढ़ें →आरती हिंदू धर्म की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र परंपरा है जो सदियों से भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रही है। यह एक भक्तिमय अनुष्ठान है जिसमें दीपक या कपूर की लौ से देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। आरती के समय मंगलमय वातावरण में घंटियों की मधुर ध्वनि, शंख की गूंज और भक्तिगीतों का सामूहिक गायन होता है जो मन को शांति और आत्मा को तृप्ति प्रदान करता है। प्रत्येक देवी-देवता की अपनी विशिष्ट आरती होती है जिसमें उनके गुणों, लीलाओं और महिमा का वर्णन होता है। सुबह और शाम की आरती का विशेष महत्व माना जाता है। आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, नकारात्मकता दूर होती है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है। यहां आपको विभिन्न देवी-देवताओं की संपूर्ण आरती संग्रह मिलेगा जिसमें लिखित पाठ के साथ-साथ उनका अर्थ और पूजा विधि भी दी गई है। चाहे आप गणेश जी की आरती हो, लक्ष्मी जी की, हनुमान जी की या किसी भी अन्य देवता की आरती खोज रहे हों, यहां आपको पूर्ण जानकारी मिलेगी।
एकादशी माता का व्रत और पूजा विष्णु‑भक्तों में विशेष स्थान रखती है। एकादशी के दिन उपवास, नियम और भक्ति से मन और इन्द्रियाँ सहज हो जाती ...
पढ़ें →श्री भैरव (भैरवजी) भीषण रूप में रक्षक और भूत‑प्रेतों के निवारक माने जाते हैं। वे काल, न्याय और भय हरने वाले अधिष्ठात्री देवता भी हैं। भ...
पढ़ें →श्री गिरिराज (गिरिवर / गोवर्धन) की आराधना भक्तों में सुरक्षा, मोक्ष और पृथ्वी‑प्रेम का आभास कराती है। पारंपरिक रूप से गिरिराज की आरती ...
पढ़ें →श्री पुरुषोत्तम देव—भगवान विष्णु/कृष्ण के आदरपूर्ण रूपों में से एक पूजनीय नाम है, जिनकी आराधना से भक्तों को मोक्ष, शुद्धि और संसारिक ...
पढ़ें →महादेव—शिवशंकर—हिंदू धर्म के सर्वशक्तिमान, विनाशक और आद्ययोगी रूप हैं। वे संहार के साथ साथ पालन और मोक्ष के भी दाता माने जाते हैं। उ...
पढ़ें →श्री कल्लाजी राठौड़ लोक‑परंपरा व राजपूत रीतियों में पूजनीय एक वीर‑देवता हैं। वे रणभूमि के रक्षक, परिश्रम और पराक्रम के प्रतीक माने जा...
पढ़ें →शनिवार का दिन भगवान शनि (शनिदेव) को समर्पित माना जाता है। शनि न्याय का प्रतीक हैं — वे कर्मफल देने वाले ग्रह हैं जो उचित परिणाम प्रदान क...
पढ़ें →शुक्रवार का दिन पारंपरिक रूप से माँ संतोषी को समर्पित माना जाता है। संतोषी माँ भक्ति, संयम और साधना के द्वारा हृदय में संतोष और घर में ...
पढ़ें →गुरुवार का दिन बृहस्पति‑देव को समर्पित माना जाता है, जो वेदों में ज्ञान, धर्म, शिक्षा, न्याय और वैभव के प्रवर्तक ग्रहीय देवता माने गए ह...
पढ़ें →बुधवार पर परंपरा अनुसार श्रीकृष्ण और गणेश जी दोनों की आराधना का विशेष महत्त्व है — कृष्ण से प्रेम और भक्ति, गणेश से बाधा निवारण और शुभ...
पढ़ें →मंगलवार भगवान हनुमानजी को समर्पित माना जाता है। हनुमानजी की आरती और भक्ति करने से साहस, संकट-निवारण और भक्त के कल्याण की प्रार्थना की ...
पढ़ें →सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। श्रद्धा‑भाव से शिवजी की आरती और व्रत करने से भक्ति, शांति, कष्ट निवारण और मनोकामना‑सिद्धि क...
पढ़ें →रविवार प्रभु सूर्यदेव को समर्पित है। श्रद्धा‑भाव से श्री सूर्यजी की आरती करने से स्वास्थ्य, दीप्ति, नेत्रदृष्टि और मनोबल बढ़ने की प्...
पढ़ें →श्री रानी सती (राणी सती मैया) का स्थानिक और लोक‑श्रद्धा में विशेष महत्त्व है—वे भक्तों की रक्षा करने वाली, संकट निवारक और धर्मपरायण दे...
पढ़ें →श्री जाहरवीर जी की आरती भक्तों में श्रद्धा, धर्म और सेवा‑भाव जगाती है। यह आरती जाहरवीर के पराक्रम, तप और भक्तों के प्रति उनके करुणा‑स्...
पढ़ें →गोरखनाथ जी योगी पदपथ के महान गुरु और नाथ संप्रदाय के प्रमुख संत माने जाते हैं। उनकी आरती श्रद्धा‑भाव से करने पर भक्तों में आत्मशक्ति, ...
पढ़ें →श्री साईं बाबा — शिरडी के अवधूत व गुरुदेव — सभी धर्मों के अनुयायियों के प्रिय थे। उनकी शिक्षाएँ प्रेम, समता और समर्पण पर आधारित हैं। श...
पढ़ें →देवी सिद्धिदात्री नवरात्रि के नवमें दिन की पूजनीय माता हैं — वे सर्वसिद्धि देने वाली परमशक्ति हैं। जिन पर श्रद्धा से भक्ति की जाती ह...
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