मानसा माता आरती | Mansa Mata / Mansa Devi Aarti
मानसा (Mansa Devi) माँ को पारंपरिक रूप से साँपों, सुरक्षा, संतान‑वांछा और रोगनिवारण से जोड़ा जाता है। वे कई स्थानों पर पूजनीय हैं—प्रमुख रूप ...
पढ़ें →गोरखनाथ महान योगी और नाथ संप्रदाय के गुरु थे। उनका मंदिर गोरखपुर में प्रसिद्ध है। गोरखनाथ ने योग का प्रचार किया। उनकी आरती आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है। नाथ योगियों में उनका विशेष स्थान है। आरती से ध्यान और एकाग्रता बढ़ती है। गोरखनाथ की कृपा से सिद्धियां मिलती हैं।
॥ गोरख आरती — दोहा‑शैली (Shree Gorakhnath Aarti) ॥
जय गोरख देवा, जय गोरख देवा।
कर कृपा मम ऊपर, नित्य करूँ सेवा॥
जय गोरख देवा॥
शीश जटा अति‑सुन्दर, भाल चन्द्र सोहे।
कानन कुण्डल झलकत, निःसंदेह मन मोहे॥
जय गोरख देवा॥
गल सेली विच नाग सुशोभित, तन भस्मी धारी।
आदि पुरुष योगीश्वर, संतजन हितकारी॥
जय गोरख देवा॥
नाथ निरंजन आप ही, घट‑घट के वासी।
करत कृपा निज जनों पर, परमेटत यम फांसी॥
जय गोरख देवा॥
ऋद्धि‑सिद्धि चरणों में लोटत, माया है दासी।
आप अलख अवधूत उत्तराखण्ड, भवानी वासी॥
जय गोरख देवा॥
अगम अगोचर अकथरूपी, सबसे हो न्यारे।
योगीजन के आप ही, सदा हो रखवारे॥
जय गोरख देवा॥
ब्रह्मा विष्णु तुम्हारे, निशदिन गुण गावें।
नारद शारद सुर मिलकर, चरणों चित लावें॥
जय गोरख देवा॥
चारों युग में आप विराजे, योगी तन तुम्हारी।
सतयुग द्वापर त्रेता, कलयुग का भय टारी॥
जय गोरख देवा॥
गुरु गोरखनाथ की आरती, नित जो गायें।
विनवत बाल त्रिलोकी, मुक्तिनिध फल पायें॥
जय गोरख देवा॥
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