मनिहारी का भेष बनाया (श्याम चूड़ी बेचने आया)
श्याम चूड़ी बेचने आया (मनिहारी का भेष बनाया) भजन के पूर्ण लिरिक्स हिंदी में उपलब्ध हैं। श्री कृष्ण की इस मधुर लीला का आनंद लें।
पढ़ें →यह भजन राधा-कृष्ण की होली लीला का वर्णन करता है। राधा कृष्ण से रंग न डालने की विनती करती हैं। होली के अवसर पर विशेष रूप से गाया जाता है। ब्रज की होली परंपरा का सुंदर चित्रण है। भजन में प्रेम और शरारत दोनों का भाव है। गाने से होली का आनंद दोगुना हो जाता है और कृष्ण प्रेम की अनुभूति होती है।
रंग मत डाले रे सांवरिया,
म्हाने गुजर मारे रे,
रंग मत डारे रे,
रंग मत डाले रे सांवरिया,
म्हाने गुजर मारे रे ||
सास बुरी छे म्हारी नणद हठीली,
सास बुरी छे म्हारी नणद हठीली,
बर्णयो बईमान बालम पीछे झगडे रे,
रंग मत डारे रे,
रंग मत डाले रे सांवरिया,
म्हाने गुजर मारे रे ||
जुलम कर डारयो,
सितम कर डारयो,
जुलम कर डारयो,
सितम कर डारयो,
कारे ने कर दियो लाल,
जुलम कर डारयो।
कोई डाले नीलो पिलो,
कोई डाले हरो गुलाबी,
कोई डाले नीलो पिलो,
कोई डाले हरो गुलाबी,
कान्हा ने डारयो लाल,
जुलम कर डारयो,
काले ने कर दियो लाल,
जुलम कर डारयो।
होरी खेलेंगे अपने गिरधर गोपाल से,
होरी खेलेंगे अपने गिरधर गोपाल से,
तुम झोली भरलो रे भक्तो,
रंग और गुलाल से,
तुम झोली भरलो रे भक्तो,
रंग और गुलाल से,
होरी खेलेंगे अपने गिरधर गोपाल से ||
लाएंगे वो संग में अपने,
ग्वाल बाल की टोली,
मैं भी रंग अबीर मलूँगी,
और माथे पर रोली,
बच बच के रहना उनकी,
टेडी मेड़ी चाल से,
होरी खेलेंगे अपने गिरधर गोपाल से,
तुम झोली भरलो रे भक्तो,
रंग और गुलाल से ||
श्याम पिया की बजे बसुरिया,
ग्वालो के मजीरे,
और संग बजावे ललिता,
नाचे राधा धीरे धीरे,
गाएंगे फाग मिलके,
हम भी सुरताल से,
तुम झोली भरलो रे भक्तो,
रंग और गुलाल से ||
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