देवता आरती संग्रह - भगवान की भक्ति और आराधना

हिंदू धर्म में विभिन्न देवताओं की आरती का अपना विशेष महत्व है। प्रत्येक देवता की आरती उनके विशेष गुणों, शक्तियों और लीलाओं का वर्णन करती है। भगवान राम धर्म और मर्यादा के प्रतीक हैं, श्री कृष्ण प्रेम और भक्ति के, भगवान शिव संहार और कल्याण के, गणेश जी विघ्नहर्ता के और हनुमान जी शक्ति और सेवा के प्रतीक माने जाते हैं। प्रत्येक देवता की आरती में उनकी महिमा और कृपा की प्रार्थना की जाती है। सुबह की आरती से दिन की शुभ शुरुआत होती है और शाम की आरती से मन को शांति मिलती है। मंगलवार को हनुमान जी की आरती, सोमवार को शिव जी की आरती, बुधवार को गणेश जी की आरती का विशेष महत्व है। आरती करते समय पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से मन को एकाग्र करना चाहिए। यहां आपको सभी प्रमुख देवताओं की संपूर्ण आरती संग्रह मिलेगा - चाहे वह राम भगवान की "ॐ जय जगदीश हरे" हो, कृष्ण की "आरती कुंजबिहारी की" हो, शिव की "जय शिव ओंकारा" हो या गणेश की "सुखकर्ता दुखहर्ता" हो। प्रत्येक आरती के साथ विस्तृत अर्थ, पूजा विधि और उसके लाभ भी दिए गए हैं।

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आरती कुंजबिहारी की (Kunj Bihari Aarti)

आरती कुंजबिहारी की ॥ आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झल...

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शिवजी की आरती (Shivji Ki Aarti)

ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ एकानन चतुराननपञ्चानन राजे। हंसासन गर...

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श्री बालाजी आरती (Shri Balaji Ki Aarti)

!! ॐ जय हनुमत वीरा !! ॐ जय हनुमत वीरा, स्वामी जय हनुमत वीरा । संकट मोचन स्वामी, तुम हो रनधीरा ॥ ॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥ पवन पुत्र अंजनी सूत, महिमा ...

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श्री गणेश आरती (Shree Ganesh Aarti)

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी । माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणेश ...

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गणपति की सेवा आरती (Ganpati Seva Aarti)

॥ आरती श्री गणपति जी ॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा,सेवा से सब विघ्न टरैं। तीन लोक के सकल देवता,द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥ गणपति की सेवा मंगल ...

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